गजल



तुझेपलभर देखनहीं पायातो तड्प तड्प मर जाउँगा,
किसी सडक या गली पर मिले तो लेकर घर जाउँगा।
सोचताहूँ कुछ पल इत्मिनान से खामोसी में ही रहूँ-
ये दिल नहीं मानता इसिलिए तुम्हे साथ लेकर जाउँगा
कई दिन बाद मैं मुहब्बतसे हमेशातेरी इन्तजारमें रहा-
दिल में जख्म होते हुए भी मुस्कुरा करअक्सर जाउँगा
हवाके झोकों से खिलते ये होठोँ मे खुशी बिखेर कर,
गुलिस्तोँ के महक जैसे अच्छी तरह सफर जाउँगा।
तू आए न आए सिर्फ तेरी याद की मिठी हवाओं से,
सारे उल्झनों तोड़कर तमन्नाओ से मै उधर जाउँगा।
एैसा लगता है मेरे नजरमें तुम्हारी नजर लग गए हैं
जो कुछ हो रोज यादों की यातनाएँ मे गुजर जाउँगा।
भूलकर कभी सफर अन्धेरे में मत करना साहिबा
तू साथ न रही तो मैं अकेले घूटघूट कर मर जाउँगा।।
पुष्प अधिकारी अंजलि
भरतपुर चितवन

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